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मुंबई पत्तन लम्बे समय से भारत का मुख्य प्रवेश द्वार रहा है और उसने राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था, व्यापार एवं वाणिज्य, और विशेष रूप से मुंबई शहर की समृध्दि में विशेष भूमिका अदा की है । पत्तन ने यह स्थान समुद्री व्यापार की बदलती आवश्यकताओं को पूरा करने के निरंतर प्रयासों के ज़रिए प्राप्त किया है । यद्यपि पारंपरिक तौर पर यह पोर्ट सामान्य कार्गो के प्रहस्तन की दृष्टि से बनाया गया है, पर विगत वर्षों में पत्तन ने बदलते नौवहन झुकावों और कार्गो पैकेजिंग के अनुरूप अपने आपको ढाल लिया है और ब्रेक बल्क से पैलेटाइज़ेशन और कंटेनरीकरण को अपनाया है । |
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इसके अलावा, पत्तन द्वारा पीओएल और रसायनों के प्रहस्तन के लिए विशेष घाट विकसित किए गए हैं । दशकों तक मुंबई पत्तन भारत का अग्रणी पत्तन रहा है। आज भी, अन्य पत्तनों के विकास के बाद भी यह परिमाण की दृष्टि से देश के महापत्तनों द्वारा प्रहस्तित समुद्री व्यापार के 8.61 प्रतिशत का प्रहस्तन कर रहा है। यह महापत्तनों द्वारा प्रहस्तित पीओएल यातायात के लगभग 16.07 प्रतिशत का प्रहस्तन भी कर रहा है । अपने प्रदीर्घ इतिहास में समुद्री व्यापार के कई परिवर्तनों में भी अपना अस्तित्व कायम रखने वाला मुंबई पत्तन आज निकटवर्ती और निजी पत्तनों की प्रतिद्वंद्विता, बदलती यातायात पद्धतियों, अंतर्निहित प्राकृतिक बाधाओं और निरंतर श्रम केंद्रित प्रचालनों आदि चुनौतियों का सामना कर रहा है। तथापि, किफायती और उच्च दर्जे की सेवाएं प्रदान करने के लिए पत्तन विभिन्न उपाय कर रहा है । |
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