|
|
मुंबई पत्तन अपनी 150वीं वर्षगांठ मना रहा है। 1873 में स्थापित यह पत्तन आज 150 वर्षों का गौरवशाली इतिहास अपने साथ लिए खड़ा है। अरब सागर के किनारे बसे मुंबई का अपनी सीमाओं पर स्थित सागर से अंतरंग संबंध रहा है। मुंबई पत्तन का निर्माण एक अद्भुत उपलब्धि थी, जो मानव कौशल और उसकी प्रगति की अटूट चाह को दर्शाता था। समुद्र से भूमि का पुनः अधिग्रहण कर दलदली क्षेत्रों को विशाल बंदरगाह में बदला गया, जहाँ उस समय के सबसे बड़े जहाज़ लगाए जा सकते थे। भारत के समुद्री व्यापार के इतिहास में मुंबई पत्तन का विशेष स्थान है। इसने मुंबई को एक कभी न रुकने वाला महानगर बनाने और राष्ट्र को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाई है। इसके महत्व को पूरी तरह समझने के लिए उस समय पर दृष्टि डालनी होगी जब यह तट व्यापार और वाणिज्य का केंद्र था। |
||
|
|||
| यहाँ यह बताना संगत है कि छत्रपति शिवाजी महाराज, जिन्हें "भारतीय नौसेना का जनक" कहा जाता है, ने अपनी मराठा नौसेना के बल पर पुर्तगालियों और ब्रिटिशों को लम्बे समय तक इन तटों से दूर रखा था। मराठों के शासन में मुंबई जहाज़ निर्माण, व्यापार और रक्षा का प्रमुख केंद्र बना। | |||
|
1668 में एक राजकीय करार के द्वारा द्वीप और पत्तन ईस्ट इंडिया कंपनी को सौंपे जाने के बाद पत्तन का विकास आरंभ हुआ। कंपनी ने कस्टम हाउस, गोदाम और ड्राय डॉक जैसी सुविधाएँ बनाकर व्यापार को बढ़ावा दिया। 1813 में ब्रिटिश संसद ने कंपनी का व्यापारिक एकाधिकार समाप्त किया जिससे पत्तन का व्यापार तेज़ी से बढ़ा। 1858 में ईस्ट इंडिया कंपनी का अधिकार समाप्त हुआ और मुंबई सीधे ब्रिटिश क्राउन के अधीन आ गया। 1873 में बॉम्बे पोर्ट ट्रस्ट अधिनियम, 1873 के अंतर्गत बॉम्बे पोर्ट ट्रस्ट की स्थापना हुई और उसके काम - काज को संभालने के लिए एक वैधानिक स्वायत न्यास बनाया गया। 3 जुलाई 1873 को न्यासी मंडल की पहली बैठक हुई। कोलकता के बाद यह दूसरा सबसे पुराना महा पत्तन न्यास है जिसके प्रशासन और प्रबंधन को 1873 से विभिन्न पत्तन उपयोगकर्ताओं, पत्तन श्रमिकों और सम्बंधित सरकारी एजेंसियों के प्रतिनिधियों के न्यासी मंडल के अंतर्गत लाया गया है। इसके परिणामस्वरूप निर्माण के एक युग का आरम्भ हुआ जिसकी शुरुआत 1875 में ससून गोदी के प्रारम्भ के साथ हुई जो 4 घाटों और 12.2 मीटर के प्रवेश द्वार के साथ जलयानों के आवागमन के लिए पहला वेट डॉक था। इसके बाद भाप से चलने वाले जहाजों की आवाजाही के लिए 1880 में 14 घाटों वाली प्रिंसेस गोदी का निर्माण हुआ जिसका प्रवेश द्वार 20.1 मीटर लम्बा और 6.4 मीटर गहरा था। 1891 में 160 मीटर लम्बाई वाले मेरवेदर ड्राय डॉक की स्थापना के साथ ड्राय डॉक भी जोड़ा गया। 1914 में 20 घाट वाली अलेक्ज़ेंड्रा गोदी के उद्घाटन के साथ निर्माण को और बल मिला जिसके परिकल्पित प्रवेश द्वार की चौड़ाई 30 मीटर, लम्बाई 180 मीटर और गहराई 10.7 मीटर थी और इसमें एक यात्री घाट भी शामिल था । 1914 से पूर्व के काल में मुंबई पत्तन की एक और उपलब्धि बी.पी.टी रेलवे का निर्माण थी । पत्तन और देश के आतंरिक इलाकों के बीच यातायात बढ़ने के परिणामस्वरूप दो मुख्य रेलवे - जीआईपी (जो अब मध्य रेलवे में विलय हो गया है) और बीबी एवं सीआई (जो अब पश्चिमी रेलवे का हिस्सा है) ने प्रिंसेस और विक्टोरिया गोदी के निकट और उससे जुड़े विशाल माल यार्ड स्थापित किए। देश के राष्ट्रपिता कहलाने वाले, भारत के स्वतंत्रता संग्राम के श्रद्धेय नेता, महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका में दो दशक बिताने के बाद 9 जनवरी 1915 के महत्वपूर्ण दिन को मुंबई पत्तन पर पहुंचे, जिसने प्रवासी भारतीय दिवस के स्मरणोत्सव की नींव रखी। वर्ष 1954-56 के बीच बुचर द्वीप (जवाहर द्वीप के रूप में पुनःनामित ) पर कच्चे तेल और पी.ओ.एल. उत्पाद के बड़े टैंकरों के लिए तीन घाटों के साथ समुद्री तेल टर्मिनल प्रारंभ किया गया । आज जवाहर द्वीप पर पत्तन के 5 घाट हैं और पत्तन अनुमत गहराई तक के कुल टन भार वाले स्यूएमैक्स टैंकरों का प्रचालन करने में सक्षम है। 1996 में पीर पाउ में एक नया अत्याधुनिक रासायनिक टर्मिनल निर्मित किया गया। पीर पाउ में रसायनों और एलपीजी के प्रचालन के लिए दूसरे नवीन रासायनिक घाट का निर्माण किया गया। तीसरा रासायनिक घाट अभी निर्माणाधीन है। इसके अलावा पत्तन में मत्स्य यातायात के प्रचालन के लिए ससून गोदी और फेरी व्हार्फ पर दो मत्स्य घाट हैं। मुंबई पत्तन भारी/बड़े आकार वाले और परियोजना कार्गो के प्रचालन में भी विशेषज्ञता रखता है। मूल रूप से सामान्य कार्गो का प्रहस्तन करने वाला मुंबई पत्तन, आज एक बहूद्देशीय पत्तन बन चुका है जो सभी प्रकार के कार्गो, ब्रेक बल्क, ड्राय बल्क, तरल बल्क कार्गो और कंटेनरों का प्रहस्तन करता है। परंपरागत रूप से मुंबई पत्तन सभी गतिविधियों का निर्वाह और सभी सेवाएँ आतंरिक रूप से ही प्रदान करता है। अतः पत्तन पायलटेज से लेकर घाटायन तक, कार्गो के भण्डारण से लेकर सुपुर्दगी तक, कंटेनर वहन स्थानकों के प्रचालन, पत्तन रेलवे और नौकाओं, उपकरण और भवनों के अनुरक्षण की सभी सहायक सेवाएँ प्रदान करता है। पत्तन में अंतरराष्ट्रीय क्रूज़ टर्मिनल की शुरुआत के साथ केंद्रीय सरकार की योजना के अनुसार मुंबई भारत की क्रूज़ राजधानी बनने की कगार पर है। पत्तन 5000 यात्री क्षमता वाले क्रूज़ जहाज़ों का प्रचालन कर सकता है। मुंबई पत्तन से भारत के 80 प्रतिशत क्रूज़ यात्रियों के आवागमन का अनुमान है जिससे अर्थव्यवस्था और रोजगार का समावेशी विकास होगा। मुंबई पत्तन ने 2,50,000 से अधिक कारों का निर्यात किया है और कार पार्किंग के लिए 1,25,000 वर्ग मीटर के निर्धारित क्षेत्र के साथ यह एक ऑटोमोबाइल हब बन गया है । मुंबई पत्तन प्राधिकरण ने केंद्र सरकार की अन्य सभी नीतियों को भी अपनाया है। प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान के आह्वान की प्रतिक्रिया में मुंबई पत्तन ने अपनी संस्कृति में स्वच्छता को आत्मसात किया है। स्वच्छता एक सतत प्रक्रिया है जिसका पालन पूरे वर्ष किया जाता है। सतर्कता जागरूकता सप्ताह प्रतिवर्ष मनाया जाता है जिसके द्वारा कर्मचारियों में सतर्कता संबंधी सिद्धांतों को पुष्ट किया जाता है । हितधारकों के प्रति अपनी कार्यप्रणाली को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए मुंबई पत्तन की स्वयं की पारदर्शिता योजना है। मुंबई पत्तन प्राधिकरण में व्हिसल ब्लोअर नीति भी लागू की गई है। मुंबई पत्तन ने ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस (ईओडीबी) के तहत मैन्युअल ई - प्लेटफॉर्म और प्रतिक्रिया का डिजिटलीकरण किया है तथा एपीआई के माध्यम से पत्तन समुदाय प्रणाली, इलेक्ट्रॉनिक वितरण ऑर्डर, पत्तन समुदाय प्रणाली के माध्यम से ग्राहक पत्तन इंटरफ़ेस, आयात और निर्यात वाहनों की आवाजाही के लिए अभिगम नियंत्रण और आरएफआईडी गेट स्वचालन, ई - ऑफिस, पत्तन उपयोगकर्ताओं हेतु मोबाइल ऐप, सम्पदा प्रचालन प्रबंधन प्रणाली, स्कैनिंग और डिजिटलीकरण, पत्तन एंटरप्राइज बिज़नेस सॉल्यूशन, प्रतिक्रिया (फीडबैक) एप्लिकेशन को लागू किया है। मुंबई पत्तन को एक हरित पत्तन बनाने के लिए प्रभावी उपाय किए गए हैं। केंद्र सरकार की नीतियों को ध्यान में रखते हुए शून्य कार्बन उत्सर्जन इसका लक्ष्य रहा है। बॉम्बे के मुंबई बनने के बाद बॉम्बे पोर्ट ट्रस्ट का नाम मुंबई पोर्ट ट्रस्ट कर दिया गया। नवंबर 2021 में महापत्तन प्राधिकरण अधिनियम लागू होने के बाद अब पत्तन का नाम मुंबई पत्तन प्राधिकरण हो गया है। |
|||
| S. No. | Title | Link Type | File Size | Last Updated |
|---|---|---|---|---|
| 1 | बम्बई का बंदरगाह | File Link | (15.39 MB) | 19 October 2023 |
| 2 | टाईडस् ऑफ टाइम | Content | 23 April 2026 |